Thursday, March 30, 2017

खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा

सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य प्रसंस्करण नीति का मसौदा सार्वजनिक टिप्पणी के लिए प्रस्तुत किया है। हालांकि यह नीति टुकड़ों में बेहतर प्रतीत होती है लेकिन इसके कुछ अहम प्रावधानों की समीक्षा आवश्यक है। ऐसा करके ही इस क्षेत्र में समावेशी विकास सुनिश्चित किया जा सकेगा। कई नीतिगत उपाय मसलन सब्सिडी, कर रियायत और सीमा शुल्क व उत्पाद शुल्क में रियायत आदि के कई उपाय तो पहले से ही लागू हैं। लेकिन एक बात जो इस नीति को औरों से अलग करती है वह यह कि इसमें कुछ अहम बाधाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। ये बाधाएं इस क्षेत्र को पूरी क्षमता से विकसित नहीं होने दे रही हैं। इसमें भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आसान बनाना और श्रम कानूनों में सुधार करना शामिल है। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और उनके मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर इसलिए जरूरी है क्योंकि कृषि उपज का एक बड़ा हिस्सा मंडी में पहुंचने के पहले ही नष्टï हो जाता है। इस दस्तावेज में कुल 46 जिंसों में फसल उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान का एक राष्टï्रव्यापी अध्ययन प्रस्तुत किया गया है जिसमें कहा गया है कि इसके चलते सालाना करीब 44,000 करोड़ रुपये मूल्य का नुकसान होता है। यह आकलन वर्ष 2009 के थोकमूल्य के आधार पर किया गया है। सब्जियों और फलों जैसी जल्द खराब होने वाली चीजों के मामले में यह नुकसान खासतौर पर बहुत अधिक है। हमारा देश इस क्षेत्र में नुकसान बरदाश्त करने की स्थिति में भी नहीं है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि इन जिंसों की आपूर्ति और इनकी कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव आता है। अगर इन वस्तुओं का समय से प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन किया जा सके तो इससे बचा जा सकता है। मूल्यवर्धन से तात्पर्य इनको ऐसा रूप देने से है ताकि ये टिकाऊ बन सकें।
प्रस्तावित नीति की एक सकारात्मक बात यह है कि यह खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के उद्यमियों के लिए सकारात्मक कारोबारी माहौल तैयार करना चाहती है। इसके लिए एकल खिड़की मंजूरी, पहले और बाद में निवेश सेवाओं की व्यवस्था, स्वनियमन और कच्चे माल तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद के लिए पूरे राज्य को एक जोन में बदलना शामिल है। नीति में आपूर्ति मजबूत करने, शीतगृहों का बुनियादी ढांचा दुरुस्त करने, कौशल विकास करने और खाद्य उत्पादकों और प्रसंस्करण करने वालों के बीच अनुबंध के जरिये तथा कॉर्पोरेट कृषि के जरिए रिश्ता कायम करने की बात शामिल है। जमीन के मुद्दे को हल करने के लिए नीति में कहा गया है कि खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए जमीन पट्टïे की सीमा समाप्त की जानी चाहिए। इसके अलावा इनको कृषि इकाई घोषित करने की बात कही गई है ताकि कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में नहीं बदलना पड़े। इसी तरह श्रम कानून के मामले में नीति में कहा गया है कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को अनिवार्य सेवा का दर्जा दिया जाए और मौसमी उद्योग मानते हुए सामान्य कानूनों से रियायत दी जाए।
मौजूदा स्वरूप में यह नीति बड़ी परियोजनाओं और खाद्य आधारित क्लस्टरों के पक्ष में झुकी हुई है। इसमें छोटी-मझोली इकाइयों के लिए खास जगह नहीं है। सरकार एक दशक से बड़े फूड पार्क का समर्थन करती आई है लेकिन इसका कोई बड़ा फायदा नहीं नजर आया। वर्ष 2008-09 से जिन 40 मेगापार्क को मंजूरी दी गई है उनमें से कुछ ही पूरे हुए हैं। हालांकि हाल के दिनों में हालात सुधरे हैं तो भी इस क्षेत्र की सालाना वृद्घि दर 2.5 फीसदी से आगे नही ंबढ़ सकी है। अब बड़े पैमाने पर छोटे और मझोले उद्यम स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। किसानों से जुड़कर ऐसी इकाइयां काफी अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं। इससे फसल में विविधता आएगी, रोजगार पैदा होगा और किसानों की आय बढ़ेगी। आपूर्ति और कीमत में स्थिरता तो आएगी ही।

Sunday, March 12, 2017

और बिक गया देश का पहला ISO सर्टिफाइड रेलवे स्टेशन

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में बना हबीबगंज रेलवे स्टेशन देश का पहला प्राइवेट रेलवे स्टेशन बन गया है। भोपाल की कंपनी बंसल ग्रुप को इस रेलवे स्टेशन का संचालन करेगी। हालांकि रेलवे के इस कदम का लोगों ने विरोध करना भी शुरू कर दिया है। ट्विटर पर लोग इस कदम का विरोध कर रहे हैं।
रेलवे ने जुलाई 2016 में पीपीपी मॉडल के तहत बंसल ग्रुप के साथ करार किया था, जिसको सोमवार से कंपनी के हाथों सौंप दिया गया है।

एयरपोर्ट टर्मिनल की तरह दिखेगी स्टेशन की बिल्डिंग

बंसल पाथवे नाम की कंपनी जहां रेलवे स्टेशन का संचालन करेगी, वहीं रेलवे गाड़ियों का संचालन करेगी। इस स्टेशन को एयरपोर्ट के स्टाइल में बनाया जाएगा। हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर पॉर्किंग से लेकर खानपान तक बंसल ग्रुप के अधीन होगा तथा इससे होने वाली आय भी इसी कंपनी को मिलेगी।

हालांकि, इससे रेलवे को  2 करोड़ रुपये सालाना राजस्व की हानि भी होगी। इस स्टेशन पर एस्केलेटर, शॉपिंग के लिए दुकानें, फूड कोर्ट और अन्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

देश का पहला आईएसओ स्टेशन है हबीबगंज

bhopal

हबीबगंज को देश का पहला आईएसओ सर्टिफिकेट मिलने का गौरव भी मिला हुआ है। यहीं से चलने वाली हबीबगंज-निजामुद्दीन भोपाल एक्सप्रेस को देश की पहली आईएसओ सर्टिफाइड ट्रेन है।

इसके बाद ही अन्य ट्रेनों को आईएसओ मिलने की कवायद शुरू हुई थी। भोपाल शहर की आधी आबादी इस स्टेशन के जरिए अपने गंतव्य की ट्रेन पकड़ती है। तीन साल के अंदर लगभग 100 करोड़ की लागत से हबीबगंज रेलवे स्टेशन को आधुनिक बनाया जायेगा।

आपात स्थिति में रेलवे स्टेशन को 4 मिनट में खाली कराया जा सकेगा। आग लगने की स्थिति में यात्री 6 मिनट में सुरक्षित स्थान तक पहुंच जायेंगे। स्टेशन पर सोलर एनर्जी का उपयोग किया जायेगा जिससे बिजली मिल सके।

स्टेशन में 6 लिफ्ट लगेंगे और 11 एस्केलेटर लगाये जायेंगे। इसके अलावा पैदल चलने वालों के लिये 2 सबवे बनाये जायेंगे और पार्सल के लिये 1 कॉरिडोर अलग से बनाया जाएगा। 

Friday, February 10, 2017

Hyderabad Test, 2nd day: कोहली का रिकार्ड दोहरा शतक, भारत का विशाल स्कोर

भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ एकमात्र टेस्ट क्रिकेट मैच के दूसरे दिन अपनी पहली पारी में छह विकेट पर 687 रन बना कर पारी समाप्ति की घोषणा की.
कप्तान विराट कोहली ने लगातार चौथी टेस्ट श्रृंखला में चौथा दोहरा शतक जमाकर नया रिकार्ड बनाया जिससे भारत ने बांग्लादेश के खिलाफ एकमात्र टेस्ट क्रिकेट मैच के दूसरे दिन शुक्रवार को हैदराबाद में छह विकेट पर 687 रन कर पारी समाप्ति की घोषणा की.

कोहली ने 204 रन की पारी खेली और इस तरह से महान सर डान ब्रैडमैन और राहुल द्रविड़ के रिकार्ड को तोड़ा जिन्होंने लगातार श्रृंखलाओं में तीन दोहरे शतक लगाये थे. कोहली ने इससे पहले वेस्टइंडीज (200), न्यूजीलैंड (211) और इंग्लैंड (235) के खिलाफ दोहरे शतक जड़े थे.